2024 संकटा माता व्रत कथा हिन्दी और विधि सम्पूर्ण जानकारी

नमस्कार मित्रों आप सभी को बताएंगे संकटा माता व्रत कथा और संपूर्ण जानकारी संकटा माता के बारे में और इसके साथ ही साथ मित्रो हमने पिछले पोस्ट में आप सभी को संकटा माता की पूजा कैसे करें इस पर आपको पोस्ट दिया है अगर आप उसको नहीं पढ़ा है तो आप क्लिक करके उसको पढ़ सकते हैं

 

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 संकटा माता व्रत कथा और विधि सम्पूर्ण जानकारी

 

चलिए इस पोस्ट को शुरू करते हैं  सबसे पहले आप सभी को हम बता दें कि

 

संकटा माता कौन हैं?

 

 तो साथियों संकटा माता कश्मीरियों की कुलदेवी के रूप में प्रसिद्ध है संकटा मैया को कुछ अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है जिनमें से कुछ प्रमुख नाम है राज्ञा देवी, खीर भवानी,संकटिया माता इत्यादि अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है चलिए शुरू करते हैं संकटा माता का व्रत कथा

संकटा माता व्रत कथा-

 

यह कथा एक बुढ़िया की है जिसमें संकटा माता दुखी बुढ़िया पर कृपा करती है उसकी समस्या का समाधान करती हैं

 एक बार की बात है एक बुढ़िया अपने बेटे और बहू के साथ एक गांव में रहती थी और कुछ दिनों बाद उसका बेटा , वह बाहर कमाने के लिए चला गया बेटे के जाने के बाद बहू उस बुढ़िया को परेशान करने लगी खाना पीना सही से नहीं देती थी चार बात अलग से सुनाती थी प्रतिदिन का यह काम चलता रहा

तो एक दिन बुढ़िया बहुत ही दुखी होकर जंगल की ओर निकल गई और वहां जाकर उसको एक कुआं दिखा और कुआं पर बैठ कर रोने लगी और  जी भर के रो कर फिर वह घर वापस आ जाती है

 

तो प्रतिदिन जब उसे डांट पड़ती तो वह उस कुएं पर जाकर रोती

 अब प्रतिदिन यह घटना देखकर एक दिन कुएं की देवी बाहर निकली और पूछने लगी की बूढ़ी मां आपको क्या समस्या है जो आप उस दिन आकर आप यहां रोती हो तो बूढ़ी मां ने कोई जवाब नहीं दिया और वह रोती ही रहे तो उस देवी ने फिर से पूछा कि मां कृपया करके अपना दुख मुझे बताइए

 

इतना कहते ही बुढ़िया ने अपना सारा दर्द देवी रानी से कह सुनाया उसने बताया कि उसका बेटा बाहर कमाने के लिए चला गया है और घर में उसकी बहू जो है उसको बहुत परेशान करती है सही से रहने नहीं देती है जिसकी वजह से वह रोज आकर इस कुएं पर जी भर के रो कर के वह  वापस घर को चली जाती है और बस यही सोचा करती है कि उसका बेटा कब बाहर से आएगा और उसके सभी दुखों का समाधान होगा

 

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 अभी यह चीज देवी सुनकर बहुत दुखी हुई और वह बुढ़िया माता से कहा कि इस वन में संकटा माता रहती हैं आप सारा दुख उनको सुनाओ वह बहुत दयालु है सभी का संकट क्षण मात्र में ही दूर कर देती है सभी पर समान रूप से दया करती हैं और दुखियों पर तो वह विशेष रूप से दया करती हैं जिसको जिस चीज की जरूरत होती है वह तुरंत ही प्रदान कर देती हैं वह बहुत सरल स्वभाव की हैं तो आप अपना सारा दुख अगर उनको सुनाएंगे तो मुझे विश्वास है कि वह आपका दुख अवश्य सुनकर उसको दूर करेंगे

 

 तो बुढ़िया , देवी की बात सुनकर अदृश्य रूप से संकटा माता का आवाहन किया और अपनी ही सारी आपबीती संकटा माता को कहा सुनाएं तो संकटा माता वहां प्रकट हो गई और कहीं हे बुढ़िया

तुम जाओ घर पर सुहागन पूजा विधि पूर्वक करना और सुहागिनों को आमंत्रित कर उन को भोजन कराना इस से तुम्हारा बेटा जल्द ही बाहर परदेस से घर आ जाएगा

 तो बुढ़िया खुश हुई उसको लगा कि अब संकटिया माता की पूजा हम कर लेंगे और हमारा बेटा घर आ जाएगा और सारी समस्या समाप्त हो जाएगी 

 

माता को प्रणाम करते हुए वापस घर लौट कर आती है और संकटा माता की पूजा सामग्री  सारी एकत्रित करने में लग जाती है  सभी सुहागिनों को निमंत्रित कर देती है उसके बाद एक घटना सामने आती हैं

जब वह पूजा के लिए लड्डू बना रही होती है तो सात लड्डू सात सुहागिनों के लिए बनाती है लेकिन वह जैसे सात लड्डू बनाती है वैसे ही बढ़कर आठ हो जाती है उसको मिलाकर बनाती है और इस चीज से वह बड़ा परेशान हो जाती है 

 

 इस बीच राज्ञा देवी माता एक बुढ़िया का रूप धरकर उस बुढ़िया की परीक्षा लेने आती हैं   माता पूछती हैं क्या बुढ़िया तुम्हारे यहां आज कोई उत्सव है क्या,   तो गुड़िया कहती है कि हां आज मैं संकटा माता की पूजन करने वाली हूं और साथ ही साथ सुहागिन को भोजन भी कराऊँगी लेकिन अजीब सी बात यह है कि जब मैं गिन कर सात लड्डू बनाती हूं तो वह बढ़कर 8 हो जाते हैं और यह चीजें मेरे समझ में नहीं आ रही है यही सब लेकर हम बहुत देर से परेशान हूँ

 

तब संकटा माता ने कहा कि किसी बूढ़ी औरत को निमंत्रित किया है तो बुढ़िया ने कहा कि नहीं माता हमने किसी को निमंत्रित नहीं किया तो संकटा माता ने कहा तो हमको ही निमंत्रित कर लो पूजा में यह सब सुनकर बुढ़िया ने संकटा माता को निमंत्रित कर लिया एक बुढ़िया के रूप में और खूब विधि विधान से संकटा माता की पूजा हुई संकटा माता की कहानी कही गई संकटा माता की आरती की गई साथ में जितनी भी सुहागिनी थी उन सभी को विधिपूर्वक भोजन जी माया गया और इतने में ही बुढ़िया को संदेश मिला कि उसका बेटा आ रहा है कहीं थोड़ा दूर पहुंचा है तू इतना सुनते ही बेटी की पत्नी तुरंत भागती हुई पति परमेश्वर से मिलने के लिए बेल वहां दौड़  गई/

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 लेकिन बुढ़िया को पता था कि यह सब संकटा मां की पूजा के बदौलत ही संभव हो पाया है तो उसने पूजा को नहीं छोड़ा और खूब विधिपूर्वक सभी सुहागलों की पूजा कर भोजन जमा कर प्यार से विदा करके तब बेटे से मिलने के लिए गई

 

 पहुंचते ही बेटे ने पूछा कि मां तुमको मैं प्यारा नहीं हूं क्या देखिए मेरी बीवी भाग कर चली आई मुझसे मिलने के लिए और आपने इतना देर क्यों लगा दिया

 तो बूढ़ी मां ने कहा बेटा मैं तुम्हारे सही सलामत घर वापस आने के लिए संकटा माता की पूजा मानी थी मैं उसी को कर रही थी उसको अधूरा छोड़ कर आना उचित नहीं समझी इसलिए बेटा मुझे देर हो गई 

 

यह सुनकर बेटे के मन में बड़ी पीड़ा हुई कि वह मां के बारे में क्या-क्या सोच रहा था और जब वह मां पर हुए अत्याचार उसको पता लगे तो उसने अपनी पत्नी का त्याग कर दिया

 

 अब वह पत्नी घर के बाहर जाकर पीपल के एक पेड़ के नीचे बैठ गई अब उसको उसके सामने कुछ नजर नहीं आ रहा था अब वहां से गुजरते हुए एक राजा की दृष्टि उस पर पड़ी और राजा ने उससे उसकी सारी समस्या पूछिए और समस्या सुनते ही राजा बहुत दुखी हुआ

 

और उसको अपने धर्म बहन के रूप में स्वीकार करें उसको अपने महल लेकर गया और यह सब सारी कहानी राजा ने रानी से कहा सुनाई रानी ने भी उसको धर्म बहन के रूप में स्वीकार किया

 अब अपने किए हुए अत्याचार का बहू को अंदाजा हो गया कि वह सास पर बहुत तरीके से अत्याचार की है राजा के महल में आंखें भी संकटा माता  का व्रत शुरु कर दिया और उसके साथ-साथ सुहागिनों को भोजन भी जिमाने लगी

 

 इसी तरह से चलता रहा और एक दिन पूजा में बहु रानी को भी सुहागन माता की पूजा में निमंत्रित किया और उस पूजा में जब रानी को प्रसाद मिला तो रानी उस प्रसाद का अनादर किया क्योंकि उस लड्डू का उनको कोई मोल नहीं दिखा

 

क्योंकि वह राजा की पत्नी रानी थी जिससे उनको बहुत सारे व्यंजन मिला करते थे इसलिए उस लड्डू को उन्होंने साधारण लड्डू ही समझा उसको संकटा माता की प्रसाद के रूप में नहीं देखा और इस चीज से बहू को अंदाजा हो गया कि अब आने वाला दिन राजा का भी बहुत गड़बड़ होगा

 

क्योंकि उन्होंने देख लिया था कि संकटा माता की पूजा का प्रभाव / विधि पूर्वक पूजा कर संकटा माता से अपने किए हुए सारे कर्मों के लिए क्षमा मांगा

 

 अब यह सब करते ही  संकटा माता की कृपा हुई और उसका पति रामनाथ खुद उसको ढूंढता हुआ राजा के महल पहुंचा और अपनी सारी गलती को स्वीकार करता हुआ वह कहां कि मेरी प्रिय धर्मपत्नी मैंने तुम्हारे साथ अच्छा नहीं किया बहू ने कहा कि कोई बात नहीं मेरे पति परमेश्वर यह सब परमात्मा का खेल है

 पति पत्नी ने मिलकर संकटा माता की विधि पूर्वक पूजा करके अपने घर की ओर प्रस्थान  होते है और जाते ही जाते बहू ने रानी से कहा कि आपने अपने धर्म बहन के रूप में मुझे स्वीकार कर अपने महल में  आश्रय दिया था अगर भविष्य में आपको कोई समस्या आ जाए तो आप निः संकोच हमारी घर आ जाइए आपके लिए हमेशा मेरे घर का द्वार खुला रहेगा /

 

बहू के जाते हैं राजा रानी के ऊपर घोर संकटों का पहाड़ टूट पड़ा और देखते ही देखते क्षण भर में उनका राज्य पाठ हड़प लिया गया सब नष्ट हो गया

तब राजा और रानी को अपने धर्म बहन की याद आई और फिर दोनों ने उनके घर की ओर प्रस्थान किया अब जब राजा रानी अपनी धर्म बहन के घर पहुंचते हैं तो उनकी धर्म बहन उनको देखते ही बड़ा दुखी होती है और रानी से कहती है कि यह सब कैसे हुआ

 सो रानी अपनी धर्म बहन को बताती हैं कि तुम्हारे जाते ही हम लोगों पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा जिसके वजह से कुछ भी नहीं बचा अब आप ही बताओ हम क्या करें

 

तब वो कहती है (धर्म बहन) हमारा काम संकटा माता के भरोसे ही रहता है अब जो करेंगे वही करेंगे चलिए हम आपको संकटा माता व्रत कथा और विधि सम्पूर्ण जानकारीदेते हैं आप वैसा ही करिए मुझे विश्वास है कि आपका खोया हुआ राज्य पाठ संकटा माता जल्द से जल्द ही लौटा देंगे

इतना सब करते रानी को भी समझ में आ गया था कि उसने एक समय पर संकटा माता के प्रसाद अनादर किया था

तब रानी ने भी संकटा माता की पूजा की और फिर उसके बाद विधिपूर्वक सभी सुहागिनों को भोजन जिमायाऔर अपने किए हुए पिछले सभी कर्मों के लिए संकटा माता से क्षमा मांग

 और यह सब करते ही दयालु संकटा माता ,रानी पर भी अपनी दया बरसाई और उसको उसका खोया हुआ सारा राज पाठ संकटा माता ने वापस लौटा दिया राजा रानी पहले की तरह अपना राजपाट चलाने लगे 

मित्रों कुछ इस प्रकार संकटिया माता की कथा थी  

इस कथा से आपको यही सीख मिलनी चाहिए कि कभी किसी को सताना नहीं चाहिए और ना ही कभी प्रसाद का अनादर करना चाहिए क्योंकि जो कुछ आदमी को मिलता है वह ऊंचा है वह नीचे है वह सब परमात्मा की ही देन है 

 

इसलिए सरल बनिए सरल ही रहिए /

क्योंकि सब परमात्मा का ही खेल है वह जब चाहे तब सब कुछ कर सकता है

 

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संकटा माता व्रत विधि –

सुबह उठकर सभी कर्मों से निवृत्त होकर स्नान कर ले, स्वच्छ वस्त्र धारण करने  के बाद जहां पर आपको पूजा करनी है वहां पर थोड़ा गंगा  जल  बिछड़ कर साफ सफाई कर ले के बाद लाल वस्त्र चौकी पर बिछाकर माता रानी का स्थान बनाएं और फिर संकटा माता की एक प्रतिमा स्थापित करें

 और संकटा माता की व्रत का संकल्प लें

और साथ में ही संकटा माता की सभी पूजा सामग्री और पूजा कैसे करनी है इस पर हमने पोस्ट लिखा है आप click कर उसको पढ़ सकते हैं

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 धन्यवाद राधे राधे

                                 

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