New 2024 चटपटा माता की कहानी -बूढ़ा और बुढ़िया

आप सभी के लिए चटपटा माता की कहानी -बूढ़ा और बुढ़िया लेकर आई हूंं | यह चटपट माता की कथा  है जिनके पास कोई संतान नहीं है हमने पिछले पोस्ट में आप सभी को चटपट माता के गीत और साथ ही साथ चटपट माता की पूजा विधि के बारे में बताया है अगर आपने उस पोस्ट को नहीं पढ़ा तो उस पर क्लिक करके आप उसको पढ़ सकते हैं

 

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चटपटा माता की कहानी -बूढ़ा और बुढ़िया की

 

 नमस्कार मित्रों में तारा तिवारी आप सभी का स्वागत करती हूं

 तो चलिए सखियों हम अपनी कहानी को शुरू करते हैं

 चटपटा माता की कहानी-

 यह कहानी एक गांव की है जिसमें एक वृद्ध बूढ़ा और बुढ़िया रहते थे | और उनकी कोई संतान नहीं थी बस जीवन ऐसे चल रहा था

एक दिन की बात है उनके पड़ोस की एक औरत शाम को बुढ़िया पास आई और कहने लगी की अम्मा कल हमारे यहां चटपट माता की पूजा है और आपको सुबह आना है  और इस तरह से अम्मा को निमंत्रित करके चली गई,अब सुबह हुआ अम्मा भी जल्दी-जल्दी अपना सारा काम करके नहा धोकर पूजा के लिए पड़ोसी के यहाँ जाने लगी |

 तो अम्मा ने अपने आदमी से कहा कि हम पूजा मेंं जा रहे हैं आप घर देखिएगा,तो वह कहते हैं ठीक है जाओ लेकिन हमारे लिए प्रसाद लेते आना ,तो कहती है ठीक है अब अम्मा चटपट माता की पूजा में  पहुंची और वहां खूब विधिपूर्वक पूजा पूरा हुआ/

 फिर सब औरत माता रानी के पास का फूल और अक्षत (प्रसाद के रूप में ) लेकर वापस अपने घर को गई / 

क्योंकि आपको बता दें की चटपट माता की पूजा में केवल प्रसाद पेड़ा मिलता है और वह भी वहीं औरत को खा ले ना होता है घर नहीं लाना होता है लेकिन अब आजकल की प्रथा में लोग थोड़ा बहुत घर लेकर जाते हैं

 तो फिर अब अम्मा के पति  प्रसाद का इंतजार कर रहे थे अम्मा घर पहुंची तो उन्होंने प्रसाद मांगा अम्मा ने उनको प्रसाद के रूप में वही फूल और अक्षत दिया तो वह वह प्रसाद देखकर नाराज हो गए और अम्मा से कहने लगे कि क्या आप भी यही पायी हो तो अम्मा कहने लगी नहीं हम तो पेड़ा खाए हैं

 तो यह सुनकर बाबा जी और नाराज हो गए और प्रसाद फेंक दिया और कहने लगे की झटपट माता पटपट माता को हम कुछ नहीं मानते हैं अगर वह इतनी शक्तिशाली हैं तो आपको एक पुत्र दे दें बस यह कह कर वह चले गए / अब दिन पर दिन बीतता गया अम्मा का धीरे-धीरे अब पेट भी फूल रहा था लोग उनसे सवाल-जवाब भी करने लगते थे की अम्मा कैसे यह आपका पेट इस उम्र में फूल रहा है

 तो फिर अम्मा भी उनको बता दी कि भैया बच्चा होने वाला है अब इसी तरह से 6 महीना 8 महीना 9 महीना बीता और अम्मा  ने एक पुत्र को जन्म दिया

 खूब धूमधाम से उस उसका  जन्म उत्सव हुआ बरही हुई सब कुछ निपट जाने के बाद अम्मा ने बाबा को याद दिलाया कि आपने झटपट माता को कुछ कहा था कि वह शक्तिशाली नहीं है तो बाबा को सब बात याद आ गई बाब कहे हां हम बहुत गलत कहे थे हम क्षमा मांगते हैं चटपट माता बहुत शक्तिशाली हैं

 तो अम्मा कही जाओ अब 14 सुहागिनों को बुलाकर लाओ और हम चटपट माता की पूजा करेंगे तो बाबा ने कहा हां हां बिल्कुल क्यों नहीं क्यों नहीं

 तो सभी सुहागिनों को बुलाया गया और खूब धूमधाम से पूजा हुआ और चट माता की आरती की गई

 तो इस तरह से मां ने बुढ़ापे में बाबा और मां को पुत्र दिया

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